प्राक्कथन
शिक्षा मानव विकास का सर्वोतम साधन है, जो जीवन पर्यन्त चलती रहती है जिसके माध्यम से मानवीय जान में वृद्धि एवं विकास होता रहता है। वर्तमान समय में मानव समाज तथा राष्ट्र की आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं की पूर्ति उत्सम शिक्षा एवं शिक्षण से ही सम्भव है। शिक्षा की प्रक्रिया में विभिन्न युगों में देश, काल एवं परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग पक्षों को प्राथमिकता दी जाती रही है। कभी शिक्षकों को, छात्रों को, कभी पाठ्यक्रम को, तो कभी शिक्षण उद्देश्यों को महत्व दिया जाता रहा है। वर्तमान समय में मानवीय ज्ञान के आधार पर पाठ्यक्रम के उद्देयों को महत्व दिया जाता है। शिक्षा के उद्देश्य साध्य होते हैं. इन्हों की प्राप्ति के लिए साधन की आवश्यकता होती है। शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति का सर्वोतम साधन शिक्षण-प्रशिक्षण प्रक्रिया, अधिगम एवं पाठ्य पुस्तकें ही हैं। किन्तु जितना अधिक ध्यान शिक्षा के उद्देश्यों पर दिया गया है उतना पाठ्यक्रम, पाठ्य पुस्तको, शिक्षण-प्रशिक्षण एवं अधिगम के स्तरों पर नहीं दिया गया है। शिक्षा प्रक्रिया की सार्थकता एवं प्रभावशीलता के लिए साध्य एवं साधन में समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ शिक्षण अधिगम प्रक्रिया पर ध्यान देना अति आवश्यक है, जिसके लिए शिक्षा मनोविज्ञान का ज्ञान होना अति आवश्यक हो जाता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत पुस्तक, अधिगम एवं विकास का मनोविज्ञान (Psychology of Learning and Development) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् द्वारा निर्मित नवीनतम पाठ्यक्रम के आधार पर निर्मित विभिन्न विश्वविद्यालयों- चौ० चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, आईएफटीएम विश्वविद्यालय मुरादाबाद, सी०एस० जे०एम० विश्वविद्यालय कानपुर, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, एच०एन०बी० गढ़वाल विश्वविद्यालय, जी०एल०ए० विश्वविद्यालय मधुरा, मोनाड विश्वविद्यालय हापुड़, शारदा विश्वविद्यालय नोएडा, आदि के एम०एड० एवं एम०ए० शिक्षाशास्त्र के विद्यार्थियों के निहितार्थ लिखी गयी है। लेखकगणों को पूर्ण विश्वास है कि जिन प्रकरणों (Topics) को इस पुस्तक में समाहित किया गया है वे सभी शिक्षा जगत से जुड़े समस्त शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए सार्थक सिद्ध रहेंगे।
प्रस्तुत पुस्तक में सम्प्रत्ययों (Concepts) को बारीकी से समझाने का प्रयास किया गया है तथा यथास्थान उपयुक्त उदाहरणों का प्रयोग किया गया है, जिससे विद्यार्थी प्रत्येक तथ्य को भली-भांति समझ सकें। शोध कार्यों का यथास्थान समावेश करना पुस्तक की प्रमुख विशेषता है। प्रत्येक विचारधारा से सम्बन्धित विद्वान का नाम उसी स्थान पर दिया गया है, जहाँ पर उस विचारधारा की चर्चा की गयी है।
प्रस्तुत पुस्तक की रचना में माता-पिता, भाई-बहन का आशीर्वाद, आकांक्षा एवं जिज्ञासा ने इसे पूर्ण करने में सहयोग प्रदान किया है। प्रस्तुत पुस्तक के लेखन में ईश्वर की असीम अनुकंपा एवं कृपा के साथ-साथ अनेक विद्वानो, शिक्षाविदों, दार्शनिकों, समाजसेवियों, साहित्य-सामग्री आदि का सहारा लिया गया है। उन सभी ज्ञात-अज्ञात, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रेरणा स्रोतों एवं मार्गदर्शकों को सादर प्रणाम। प्रयास यही रहा है कि पुस्तक में कोई त्रुटि न रहे, फिर भी पूर्णता का दावा नहीं किया जा सकता। पुस्तक की सार्थकता और उपादेयता तो विद्वानों, सहयोगियों, शिक्षक बन्धुओं तथा विद्यार्थियों की ग्राह्यता और रचनात्मक सुझावों पर निर्भर करती है। अतः आप सभी के सुझाव आमन्त्रित हैं।
अन्त में लेखकगण इस पुस्तक की लेज़र टाइपिंग सैटिंग हेतु गर्वित कम्प्यूटर्स एवं आर० लाल बुक डिपो प्रकाशन के स्वामी श्रद्धेय श्री विनय रखेजा जी का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने अपने श्रम साध्य से प्रस्तुत पुस्तक को आपके हाथों में पहुंचाया है।
Reviews
There are no reviews yet.